एपिसोड की शुरुआत Anupama Written Update 14 August 2025 : राखी के इस खास दिन की शुरुआत होती है जिग्नेश और मनोहर की मुलाकात से। जिग्नेश उन्हें प्यार से (जीजा जी)कहकर बुलाते हैं लेकिन मनोहर उनका नाम ही भूल जाते हैं और महेश कह देते हैं। जिग्नेश को हैरानी होती है और वह लीला से वजह पूछते हैं तो लीला साफ कर देती हैं कि मनोहर उनके जीजा जी हैं ही नहीं। इसी बीच जिग्नेश सोचते हैं कि हसमुख अब इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन तभी हसमुख सामने आ जाते हैं और उन्हें अपने साथ ले जाते हैं। जिग्नेश की आंखों में तुरंत खुशी लौट आती है।
लीला की मिठाई और अनुपमा का हुआ परिचय
लीला अनुपमा को भव्येश के लिए मिठाई देती हैं और कहती हैं कि यह प्रार्थना के जरिए प्रेम बादशाह और राजा तक भी पहुंचा देना। अनुपमा भी मौका पाकर किंजल और शाह परिवार का परिचय जिग्नेश से करवाती हैं।
कोठारी परिवार का खराब हुआ माहौल
वसुंधरा के घर में रक्षाबंधन की धूम मची है सच कहूं तो सब सिर पर चढ़े हुए हैं। ख्याति परी राही और माही सबको वसुंधरा बोलती है जाओ शाह हाउस में जाकर त्योहार मनाओ लेकिन पराग का मूड देखो उसे लगता है कि वहां सिर्फ लड़ाई-झगड़े मिलेंगे तो साफ मना कर देता है। ख्याति भी कम नहीं है, अपनी जिद पर अड़ी रहती है मानने का नाम ही नहीं लेती। वसुंधरा भी बड़ी है – बोल देती है मैं किसी को राखी बांधने से रोकूंगी नहीं जो करना है करो। उधर प्रेम का मन है प्रार्थना को फोन करने का लेकिन वसुंधरा सीधा मना कर देती है।
अंश को मिला तोहफा
इधर शाह हाउस में लीला जिग्नेश के साथ राखी बांधने में व्यस्त हैं। अंश उदास है क्योंकि उसकी तीन बहनें हैं लेकिन वे पास नहीं हैं। तभी परी माही और राही अचानक पहुंचते हैं और उसे गले लगाकर सरप्राइज देते हैं। सभी के चेहरे पर खुशी लौट आती है।
पाखी को आया गुस्सा और अनुपमा की सीख
पाखी का गुस्सा अभी भी ठंडा नहीं पड़ा भाई परितोष से तो बिल्कुल भी बात करने का मूड नहीं है आखिर सबके सामने उसने उसकी बेइज्जती जो कर दी थी! अब राखी बांधने का सवाल ही नहीं उठता समर की याद आते ही पाखी की आंखें भर आती हैं और अनुपमा पास आकर समझाती है जो पल हैं उन्हें जी भर के जी ले बेटा कल किसने देखा है परितोष भी आखिरकार हार मान जाता है झिझकते हुए माफी मांगता है. थोड़ी देर की नाराजगी के बाद भाई-बहन फिर से गले लग जाते हैं.
प्रार्थना की सरप्राइज एंट्री कोठारी परिवार में
उधर प्रेम राजा और बादशाह प्रार्थना का इंतजार कर रहे होते हैं। राजा याद दिलाता है कि प्रार्थना कभी राखी बांधने से पहले खाना नहीं खाती। प्रेम कहता है कि अगर वह नहीं आई तो वह खुद उससे मिलने जाएगा। तभी दरवाजे पर प्रार्थना आती है। वह कोठारी परिवार से माफी मांगती है और राखी का त्योहार उनके साथ मनाती है।
खुशियों का संगम में हुई कड़वी बातें
थोड़ी देर बाद शाह परिवार भी कोठारी हाउस पहुंचता है और सभी मिलकर डांस और मस्ती करते हैं। लीला वनराज को याद कर भावुक हो जाती हैं। प्रार्थना अनुपमा को धन्यवाद देती है कि उसने ही उसे आने के लिए प्रोत्साहित किया।
एपिसोड के एंड में अनुपमा की किस्मत ही देखो वो सीधे राही से टकरा जाती है। बेचारी तुरंत माफी भी मांग लेती है पर राही का मूड तो अलग ही लेवल पर ठंडा है। वो तंज मारते हुए बोल देती है तुमसे तो बस लोगों को चोट पहुंचाना ही आता है चाहे जानबूझकर करो या फिर गलती से। मतलब बात की भी हद हो गई.